NCERT CLASS 9TH SCIENCE CHAPTER 9 GURUTVAKARSHAN IN HINDI QUESTION ANSWER || एनसीईआरटी कक्षा 9वीं विज्ञान अध्याय 9 गुरुत्वाकर्षन हिंदी प्रश्न उत्तर

 पृष्ठ प्रश्न


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प्रश्न 1. गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइए।

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहता है कि ब्रह्मांड की हर वस्तु दूसरी वस्तु को एक बल से आकर्षित करती है, और यह बल दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। साथ ही, उनके बीच की दूरी बढ़ने पर यह बल कम हो जाता है।

न्यूटन के अनुसार यह बल इस नियम से तय होता है—
दो वस्तुओं के बीच का गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है, और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

यह नियम हमें बताता है कि ग्रह सूर्य के चारों ओर क्यों घूमते हैं, चाँद धरती के साथ क्यों बना रहता है, और हम जमीन पर क्यों टिके रहते हैं। यही वजह है कि यह नियम विज्ञान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।




प्रश्न 2. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।

उत्तर: पृथ्वी और किसी वस्तु के बीच गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात करने का सूत्र है—

F = G M m / R²

यहाँ,

  • F = गुरुत्वाकर्षण बल

  • G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक

  • M = पृथ्वी का द्रव्यमान

  • m = वस्तु का द्रव्यमान

  • R = पृथ्वी और वस्तु के बीच की दूरी



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प्रश्न 1. मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मुक्त पतन वह स्थिति है जब कोई वस्तु सिर्फ गुरुत्वाकर्षण बल के कारण नीचे गिरती है और उस पर हवा या किसी और तरह का बल असर नहीं करता।

इसे आसान तरीके से समझें तो, जैसे मैंने एक बार छत से छोटी गेंद नीचे गिराई—अगर हवा का कोई रुकावट न हो, तो वह सीधी नीचे आएगी। यही प्रक्रिया मुक्त पतन कहलाती है।




प्रश्न 2. गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: गुरुत्वीय त्वरण वह त्वरण है जो किसी वस्तु को केवल धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण मिलता है। इसे हम g से दर्शाते हैं, और इसका मान लगभग 9.8 m/s² माना जाता है।

जब मैंने पहली बार किसी गेंद को ऊपर फेंका, तो मैंने देखा कि वह धीरे-धीरे रुककर वापस नीचे आती है—असल में यही गुरुत्वीय त्वरण की वजह से होता है। धरती उसे लगातार नीचे की तरफ तेजी देती रहती है।


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प्रश्न 1. किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अंतर है?

उत्तर: द्रव्यमान और भार दो अलग बातें हैं, लेकिन अक्सर बच्चे इन्हें एक जैसा समझ लेते हैं।

  • द्रव्यमान (Mass): किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की मात्रा को द्रव्यमान कहते हैं। यह हमेशा समान रहता है, चाहे आप धरती पर हों या चाँद पर।

  • भार (Weight): किसी वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण द्वारा लगाया गया बल उसका भार कहलाता है। यह जगह बदलने पर बदल जाता है।




प्रश्न 2. किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का 1/6 गुणा क्यों होता है?

उत्तर: चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में बहुत कम होता है। असल में चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का मात्र 1/6 हिस्सा है। इसी कारण किसी भी वस्तु का भार वहाँ पहुँचकर अपने असली भार का 1/6 रह जाता है।

उदाहरण—अगर मेरा भार धरती पर 60 kg हो, तो चन्द्रमा पर वह सिर्फ 10 kg जैसा महसूस होगा। फर्क सिर्फ इतना है कि वहाँ का गुरुत्वाकर्षण बहुत कमजोर है, इसलिए वस्तुएँ हल्की लगती हैं। यही वजह है कि चन्द्रमा पर भार 1/6 हो जाता है।



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प्रश्न 1. एक पतली तथा मज़बूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?

उत्तर: पतली डोरी से बने पट्टे कंधे पर बहुत ज़्यादा दबाव डालते हैं। क्योंकि दबाव हमेशा बल ÷ क्षेत्रफल के बराबर होता है।
पतली डोरी का क्षेत्रफल बहुत कम होता है, इसलिए उसी वजन का बैग कंधे पर ज़्यादा दर्द करता है और उठाना मुश्किल लगता है।

उदाहरण-- स्कूल में मेरा बैग जब पतले स्ट्रैप वाले थे, तो थोड़ी देर चलने पर कंधे में निशान तक पड़ जाते थे। बाद में जब चौड़े पट्टे वाले बैग लिए, तो वही वजन काफी हल्का महसूस होने लगा। यही कारण है कि पतली डोरी से बैग उठाना हमेशा कठिन होता है।



प्रश्न 2. उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: उत्प्लावकता वह ऊर्ध्वाधर (ऊपर की ओर) बल है जो किसी द्रव या गैस में डूबी वस्तु पर लगता है। इसी बल की वजह से कुछ चीजें पानी पर तैर जाती हैं और कुछ थोड़ा हल्का महसूस होती हैं।

उदाहरण-- अपनी बोतल वाला रबर बॉल पानी में डाला—वह ऊपर की तरफ उठने लगा। उस समय लगा कि पानी जैसे उसे ऊपर धकेल रहा है। यही ऊपर की तरफ उठाने वाला बल उत्प्लावकता कहलाता है।




प्रश्न 3. पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है?

उत्तर: किसी वस्तु का तैरना या डूबना उसकी घनत्व और पानी द्वारा लगने वाली उत्प्लावकता पर निर्भर करता है।

  • अगर वस्तु का घनत्व पानी से कम हो, तो पानी उसे ऊपर की ओर ज्यादा बल देता है और वस्तु तैर जाती है।

  • लेकिन अगर वस्तु का घनत्व पानी से ज्यादा हो, तो पानी का ऊपर की ओर बल कम पड़ जाता है और वस्तु डूब जाती है।



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प्रश्न 1. एक तुला (weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं। क्या आपका द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम?

उत्तर: तुला पर जो 42 kg दिखता है, वह असल में आपका द्रव्यमान ही होता है, क्योंकि मशीन आपको पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के आधार पर मापती है। इसलिए आपका द्रव्यमान न 42 kg से अधिक होता है और न ही कम। इसे यही सही मान माना जाता है।

मैंने भी जब पहली बार मशीन पर अपना वजन देखा था, तो मुझे लगा था कि शायद यह थोड़ा ज़्यादा या कम दिखा रहा होगा, लेकिन विज्ञान की नजर से मशीन का दिखाया गया मान ही द्रव्यमान माना जाता है।


प्रश्न 2. आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?

उत्तर: समान द्रव्यमान दिखाने पर भी लोहे की छड़ असल में भारी महसूस होती है, क्योंकि लोहे का घनत्व बहुत अधिक होता है। इसका मतलब है कि लोहा कम जगह में ज्यादा द्रव्यमान रखता है।

रुई का बोरा हल्का महसूस होता है क्योंकि रुई का घनत्व कम होता है और वह बहुत ज्यादा जगह घेरती है। इस वजह से—even अगर दोनों का द्रव्यमान 100 kg हो—लोहे की छड़ उठाने पर ज्यादा भारी लगती है।




अभ्यास


प्रश्न 1. यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
इसलिए अगर दूरी को आधा कर दिया जाए, तो गुरुत्वाकर्षण बल चार गुना (4 गुना) बढ़ जाता है।



प्रश्न 2. सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हलकी वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती?

उत्तर: हालांकि गुरुत्वीय बल वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है, पर गिरने की तेज़ी (त्वरण) उसी बल और द्रव्यमान के अनुपात पर निर्भर करती है।

गुरुत्वीय त्वरण g=F/mg = F/m होता है। अगर वस्तु का द्रव्यमान बड़ा है, तो बल भी बड़ा होता है। लेकिन द्रव्यमान और बल दोनों बढ़ने के कारण त्वरण समान रहता है

इसलिए, भारी और हलकी वस्तु समान गति से गिरती हैं




प्रश्न 3. पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6 × 10²⁴ kg है तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 × 10⁶ m)

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है—

[
F = \frac{G M m}{R^2}
]

जहाँ,

  • ( G = 6.67 × 10^{-11} , N·m²/kg² )

  • ( M = 6 × 10^{24} , kg ) (पृथ्वी का द्रव्यमान)

  • ( m = 1 , kg ) (वस्तु का द्रव्यमान)

  • ( R = 6.4 × 10^6 , m ) (पृथ्वी की त्रिज्या)

अब मान डालकर गणना करें—

[
F = \frac{6.67 × 10^{-11} × 6 × 10^{24} × 1}{(6.4 × 10^6)^2}
]

[
F ≈ \frac{4 × 10^{14}}{4.096 × 10^{13}}
]

[
F ≈ 9.8 , N
]

इसका मतलब है कि 1 kg वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्वीय बल लगभग 9.8 न्यूटन होगा, जो हमें उसका भार भी बताता है।



प्रश्न 4. पृथ्वी तथा चंद्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों।

उत्तर: पृथ्वी और चंद्रमा एक-दूसरे को समान बल से आकर्षित करते हैं। यह न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के तीसरे नियम के अनुसार होता है – “हर क्रिया के लिए समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।”

इसका मतलब है कि—

  • पृथ्वी चंद्रमा को जितना खींचती है, चंद्रमा भी उतना ही पृथ्वी को खींचता है।

  • बल बराबर होता है, चाहे पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा से बहुत बड़ा हो।




प्रश्न 5. यदि चंद्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?

उत्तर: दरअसल, पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति करती है, लेकिन हमें यह दिखाई नहीं देता क्योंकि पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा की तुलना में बहुत बड़ा है।

  • न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार बल तो बराबर है, लेकिन त्वरण a=F/ma = F/m द्रव्यमान के विपरीत होता है।

  • चंद्रमा का द्रव्यमान छोटा होने के कारण वह जल्दी गति में बदलाव करता है, जबकि पृथ्वी का द्रव्यमान बहुत बड़ा है, इसलिए उसका गति में बदलाव बहुत कम होता है।





प्रश्न 6. दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा, यदि
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए?
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए?
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ?

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है—

F=Gm1m2r2F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}

  • (i) एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना करें:
    फोर्स FF द्रव्यमान के सीधे अनुपाती है। अगर m1m_1 दोगुना हो जाए, तो बल भी दोगुना हो जाएगा।

  • (ii) दूरी दोगुनी या तीन गुनी कर दी जाए:
    बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है।

    • अगर rr दोगुना हो जाए → F=F/4F = F/4 (चार गुना कम)

    • अगर rr तीन गुना हो जाए → F=F/9F = F/9 (नौ गुना कम)

  • (iii) दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए:
    बल दोनों द्रव्यमान के गुणनफल पर निर्भर करता है। अगर m1m_1 और m2m_2 दोनों दोगुने हों, तो FF 4 गुना हो जाएगा।




प्रश्न 7. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व हैं?

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का विज्ञान और हमारे जीवन में बहुत महत्व है। मुख्य बातें इस प्रकार हैं—

  1. ग्रहों और चंद्रमाओं की गति समझना:
    यह नियम बताता है कि ग्रह सूर्य के चारों ओर और चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर क्यों घूमते हैं।

  2. वस्तुओं के गिरने का कारण:
    किसी भी वस्तु का जमीन की ओर गिरना इसी नियम की वजह से होता है।

  3. भौतिक और खगोल विज्ञान में आधार:
    यह नियम न्यूटन के सिद्धांतों का आधार है और अंतरिक्ष में अंतरिक्षयान, उपग्रह आदि की गति को समझने में मदद करता है।

  4. हमारे रोज़मर्रा के जीवन में:
    हम जमीन पर टिके रहते हैं, पानी की धाराएँ और ज्वार-भाटा जैसी घटनाएँ इसी नियम के कारण होती हैं।

उदाहरण-- अंतरिक्ष पर सैटेलाइट की गति और पृथ्वी के चारों ओर उसके घूमने का वीडियो देखा। इसे देखकर समझ आया कि गुरुत्वाकर्षण के नियम बिना देखे भी पूरे ब्रह्मांड की चीज़ों को नियंत्रित करते हैं।



प्रश्न 8. मुक्त पतन का त्वरण क्या है?

उत्तर: मुक्त पतन का त्वरण वह त्वरण है जो किसी वस्तु को सिर्फ पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण प्राप्त होता है, यानी उस पर कोई अन्य बल काम नहीं कर रहा होता। इसे g से दर्शाया जाता है और इसका मान लगभग 9.8 m/s² है।



प्रश्न 9. पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?

उत्तर: पृथ्वी और किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वीय बल को हम वस्तु का भार (Weight) कहते हैं।

  • यह बल वस्तु के द्रव्यमान और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है।

  • आसान शब्दों में, यही वह बल है जो हमें धरती पर टिके रहने में मदद करता है और वस्तु को नीचे खींचता है।




प्रश्न 10. एक व्यक्ति A अपने एक मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं, तो क्यों? (संकेत: ध्रुवों पर g का मान विषुवत वृत्त की अपेक्षा अधिक है)

उत्तर: नहीं, मित्र संतुष्ट नहीं होगा।

  • कारण यह है कि ध्रुवों पर गुरुत्वीय त्वरण (g) विषुवत वृत्त की तुलना में अधिक होता है

  • सोने का भार W=mgW = m \cdot g होता है।

  • इसलिए, यदि सोना ध्रुवों पर खरीदा गया था, तो वहाँ इसका भार ज्यादा था। जब वही सोना विषुवत वृत्त पर लिया जाता है, तो gg कम होने के कारण सोने का भार कम हो जाता है।



प्रश्न 11. एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़ कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?

उत्तर: कागज की सपाट शीट और मरोड़ कर बनाई गई गेंद पर गुरुत्वाकर्षण बल तो बराबर काम करता है, लेकिन हवा का प्रतिरोध अलग होता है।

  • सपाट शीट पर हवा का प्रतिरोध ज्यादा होता है, इसलिए वह धीरे-धीरे गिरती है।

  • मरोड़ कर बनाई गई गेंद का आकार छोटा और सघन होता है, हवा आसानी से उसके चारों ओर बह जाती है, इसलिए वह जल्दी नीचे गिरती है।




प्रश्न 12. चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 1/6 गुणा है। एक 10 kg की वस्तु का चंद्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?

उत्तर: वस्तु का भार ( W = m \cdot g ) से ज्ञात किया जाता है।

  • पृथ्वी पर:
    ( m = 10 , kg ), ( g = 9.8 , m/s² )
    [
    W = 10 × 9.8 = 98 , N
    ]

  • चंद्रमा पर:
    चंद्रमा का g = 1/6 × 9.8 = 1.63 m/s²
    [
    W = 10 × 1.63 ≈ 16.3 , N
    ]

इसका मतलब है कि वही वस्तु चंद्रमा पर बहुत हल्की महसूस होगी, और इसका भार केवल 16.3 न्यूटन होगा।

उदाहरण—सोचा कि अगर मैं अपने 10 kg बैग को चंद्रमा पर रखूँ, तो वह सिर्फ हल्का बोझ जैसा लगेगा, पृथ्वी पर जैसा भारी नहीं।



प्रश्न 13. एक गेंद उर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है। परिकलन कीजिए:
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय

उत्तर:

(i) अधिकतम ऊँचाई (H):

सूत्र: v2=u22gHv^2 = u^2 - 2 g H

0=4922×9.8×H0 = 49^2 - 2 × 9.8 × H 2401=19.6×H2401 = 19.6 × H H=2401/19.6122.5mH = 2401 / 19.6 ≈ 122.5 \, m

तो गेंद लगभग 122.5 मीटर की ऊँचाई तक जाएगी।


(ii) कुल समय (T) पृथ्वी पर लौटने में:

ऊपर जाने का समय: tup=u/g=49/9.8=5st_{up} = u / g = 49 / 9.8 = 5 \, s
नीचे आने का समय समान होगा क्योंकि गति समान और गुरुत्व समान है।

T=tup+tdown=5+5=10sT = t_{up} + t_{down} = 5 + 5 = 10 \, s

उत्तर:

  • अधिकतम ऊँचाई: 122.5 m

  • कुल समय: 10 s




प्रश्न 14. 19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

सूत्र:
[
v^2 = u^2 + 2 g h
]

[
v^2 = 0 + 2 × 9.8 × 19.6
]

[
v^2 = 384.16
]

[
v ≈ 19.6 , m/s
]

 पत्थर का अंतिम वेग पृथ्वी पर पहुँचने से पहले लगभग 19.6 m/s होगा।




प्रश्न 15. कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m/s के प्रारंभिक वेग से फेंका गया है। g = 10 m/s² लेते हुए ग्राफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुँची अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गई कुल दूरी कितनी होगी?

उत्तर:

(i) अधिकतम ऊँचाई (H):

[
v^2 = u^2 - 2 g H
]

[
0 = 40^2 - 2 × 10 × H
]

[
1600 = 20 × H
]

[
H = 80 , m
]

तो अधिकतम ऊँचाई 80 m होगी।


(ii) नेट विस्थापन:

नेट विस्थापन = अंतिम स्थिति − प्रारंभिक स्थिति
[
\text{नेट विस्थापन} = 0 , m \quad (\text{क्योंकि पत्थर अंत में वहीँ आता है जहाँ से फेंका गया})
]


(iii) कुल दूरी:

कुल दूरी = ऊपर की दूरी + नीचे की दूरी
[
\text{कुल दूरी} = 80 + 80 = 160 , m
]


उत्तर सारांश:

  • अधिकतम ऊँचाई: 80 m

  • नेट विस्थापन: 0 m

  • कुल दूरी: 160 m




प्रश्न 16. पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 × 10²⁴ kg, सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 10³⁰ kg, और दोनों के बीच औसत दूरी = 1.5 × 10¹¹ m।

उत्तर: गुरुत्वाकर्षण बल का सूत्र है—

[
F = G \frac{M_1 M_2}{r^2}
]

दी गई जानकारी:

  • ( M_1 = 6 × 10^{24} , kg ) (पृथ्वी)

  • ( M_2 = 2 × 10^{30} , kg ) (सूर्य)

  • ( r = 1.5 × 10^{11} , m )

  • ( G = 6.67 × 10^{-11} , N·m²/kg² )


गणना:
[
F = \frac{6.67 × 10^{-11} × 6 × 10^{24} × 2 × 10^{30}}{(1.5 × 10^{11})^2}
]

[
F = \frac{8.004 × 10^{44} × 10^{-11}}{2.25 × 10^{22}}
]

[
F = \frac{8.004 × 10^{33}}{2.25 × 10^{22}} ≈ 3.56 × 10^{11} , N
]

उत्तर: पृथ्वी और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल लगभग 3.56 × 10¹¹ न्यूटन है।

उदाहरण—इतना बड़ा बल ही पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर बनाए रखता है और हमें अंतरिक्ष में ग्रहों की गति को समझने में मदद करता है।




प्रश्न 17. कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे।

उत्तर:

(i) पत्थरों की स्थिति के समीकरण:

  1. पहला पत्थर (नीचे गिरता हुआ) का स्थान ( y_1 ) ऊपर से नीचे मापन करते हुए—
    [
    y_1 = h - \frac{1}{2} g t^2 = 100 - 5 t^2
    ]

  2. दूसरा पत्थर (ऊपर फेंका हुआ) का स्थान ( y_2 ) नीचे से मापन करते हुए—
    [
    y_2 = u_2 t - \frac{1}{2} g t^2 = 25 t - 5 t^2
    ]

पत्थर तभी मिलेंगे जब उनकी ऊँचाई समान होगी:
[
y_1 = y_2
]

[
100 - 5 t^2 = 25 t - 5 t^2
]

दोनों तरफ से ( -5 t^2 ) कट जाता है:
[
100 = 25 t
]

[
t = 4 , s
]


(ii) मिलन की ऊँचाई:

अब ( t = 4 ) सेकंड को किसी भी पत्थर के समीकरण में डालें:

[
y_2 = 25 × 4 - 5 × 4^2 = 100 - 80 = 20 , m
]

तो दोनों पत्थर नीचे से 20 m ऊपर पर मिलेंगे।

उदाहरण—पहला पत्थर ऊपर से गिरता है, दूसरा ऊपर की ओर फेंका गया। 4 सेकंड में दोनों एक ही जगह 20 m ऊपर मिल जाते हैं।



प्रश्न 18. ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6 s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए:
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई;
(b) गेंद द्वारा पहुँची गई अधिकतम ऊँचाई; तथा
(c) 4 s पश्चात् गेंद की स्थिति।

उत्तर:

(a) प्रारंभिक वेग (u):

ऊपर जाने और नीचे लौटने में समय बराबर होता है।
[
t_{up} = t_{down} = T/2 = 3 , s
]

ऊपर जाने का समय: ( t_{up} = u/g )
[
u = g \cdot t_{up} = 10 × 3 = 30 , m/s
]

प्रारंभिक वेग: ( u = 30 , m/s )


(b) अधिकतम ऊँचाई (H):

[
H = \frac{u^2}{2 g} = \frac{30^2}{2 × 10} = \frac{900}{20} = 45 , m
]

अधिकतम ऊँचाई: ( H = 45 , m )


(c) 4 s पश्चात् गेंद की स्थिति:

  • 4 s में गेंद 3 s ऊपर जाती है और फिर 1 s नीचे आती है।

  • ऊपर की गति रुकने के बाद नीचे की गति = ( v = g t = 10 × 1 = 10 , m/s )

  • स्थिति (नीचे से):
    [
    s = H - \frac{1}{2} g t_{down}^2 = 45 - 5 × 1^2 = 45 - 5 = 40 , m
    ]

स्थिति: 4 s बाद गेंद नीचे से 40 m ऊपर होगी।

उदाहरण— गेंद 3 s में 45 m तक ऊपर जाती है और फिर नीचे लौटने लगती है। 4 s पर यह थोड़ी नीचे आकर 40 m पर होती है।



प्रश्न 19. किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?

उत्तर: किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल हमेशा ऊपर की दिशा में कार्य करता है।

  • यह बल द्रव द्वारा वस्तु को ऊपर की ओर धकेलने के लिए लगता है।

  • यही कारण है कि पानी में कुछ वस्तुएँ तैरती हैं।



प्रश्न 20. पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है?

उत्तर: प्लास्टिक का गुटका पानी में इसलिए तैरता है क्योंकि उस पर उत्प्लावन बल (upthrust) कार्य करता है।

  • पानी उस गुटके पर ऊपर की दिशा में बल लगाता है।

  • यदि गुटके का घनत्व पानी से कम होता है, तो उत्प्लावन बल उसके भार से अधिक होता है।

  • परिणामस्वरूप गुटका ऊपर की ओर उठता है और पानी की सतह पर आ जाता है।

उदाहरण—जैसे अगर आप पानी में हल्की प्लास्टिक की गेंद डुबोते हैं, वह तुरंत ऊपर उठकर तैरने लगती है। यही घनत्व और उत्प्लावन बल का खेल है।



प्रश्न 21. 50 g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm³ है। यदि पानी का घनत्व 1 g/cm³ हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा?

उत्तर: सबसे पहले पदार्थ का घनत्व ज्ञात करें:

[
\text{घनत्व} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}} = \frac{50}{20} = 2.5 , g/cm^3
]

  • पानी का घनत्व = 1 g/cm³

  • पदार्थ का घनत्व = 2.5 g/cm³

निष्कर्ष:
चूंकि पदार्थ का घनत्व पानी से ज्यादा है, इसलिए यह पानी में डूब जाएगा, तैर नहीं पाएगा।



प्रश्न 22. 500 g के एक मोहरबंद पैकेट का आयतन 350 cm³ है। पैकेट 1 g/cm³ घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?

उत्तर:

(i) पैकेट तैरेगा या डूबेगा?

सबसे पहले पैकेट का घनत्व ज्ञात करें:

[
\text{घनत्व} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}} = \frac{500}{350} \approx 1.43 , g/cm^3
]

  • पानी का घनत्व = 1 g/cm³

  • पैकेट का घनत्व = 1.43 g/cm³

निष्कर्ष: पैकेट का घनत्व पानी से अधिक है, इसलिए यह डूब जाएगा, तैर नहीं पाएगा।


(ii) पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान

जब पैकेट पूरी तरह डूब जाता है, तो यह अपने आयतन के बराबर पानी विस्थापित करता है

[
\text{विस्थापित पानी का द्रव्यमान} = \text{आयतन × पानी का घनत्व} = 350 × 1 = 350 , g
]

उदाहरण— जैसे पैकेट भारी है, इसलिए पूरा डूब जाएगा और केवल अपने आयतन के बराबर पानी को धकेलेगा।




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