NCERT CLASS 9TH SCIENCE CHAPTER 8 BAL TATHA GATI KE NIYAM | एनसीईआरटी कक्षा नौवीं विज्ञान अध्याय आठ बल तथा गति के नियम

 

पृष्ठ प्रश्न

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प्रश्न 1: निम्न में किसका जड़त्व अधिक है:
(a) एक रबर की गेंद एवं उसी आकार का पत्थर,
(b) एक साइकिल एवं एक रेलगाड़ी,
(c) पाँच रुपये का एक सिक्का एवं एक रुपये का सिक्का।

उत्तर : जड़त्व हमेशा द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जिसका द्रव्यमान ज्यादा, उसका जड़त्व भी ज्यादा। इसे ऐसे समझो जैसे भारी चीज़ें जल्दी हिलती नहीं और न ही जल्दी रुकती हैं।

(a)  पत्थर का जड़त्व अधिक है
(b) रेलगाड़ी का जड़त्व बहुत अधिक है 
(c) पाँच रुपये का जड़त्व अधिक  है





प्रश्न 2: नीचे दिए गए उदाहरण में गेंद का वेग कितनी बार बदलता है, जानने का प्रयास करें:

“फुटबॉल का एक खिलाड़ी गेंद पर किक लगाकर गेंद को अपनी टीम के दूसरे खिलाड़ी के पास पहुँचाता है। दूसरा खिलाड़ी उस गेंद को किक लगाकर गोल की ओर पहुँचाने का प्रयास करता है। विपक्षी टीम का गेंदकीपर गेंद को पकड़ता है और अपनी टीम के खिलाड़ी की ओर किक लगाता है।” इसके साथ ही उस कारक की भी पहचान करें जो प्रत्येक अवस्था में बल प्रदान करता है।

उत्तर : इस पूरी घटना में गेंद का वेग 4 बार बदलता है

  1. पहला खिलाड़ी किक करता है → गेंद चलती है

    • बल देता है पहला खिलाड़ी

  2. दूसरा खिलाड़ी किक करता है → दिशा/वेग बदलता है

    • बल देता है दूसरा खिलाड़ी

  3. गोलकीपर गेंद पकड़ता है → गेंद रुक जाती है

    • बल देता है गोलकीपर

  4. गोलकीपर फिर किक लगाता है → गेंद दोबारा चलती है

    • बल देता है गोलकीपर

कुल वेग परिवर्तन = 4 बार।





प्रश्न 3: किसी पेड़ की शाखा को तीव्रता से हिलाने पर कुछ पत्तियाँ झड़ जाती हैं। क्यों?

उत्तर : जब शाखा को अचानक हिलाया जाता है, तो शाखा तो तुरंत हिलती है लेकिन पत्तियाँ अपने जड़त्व की वजह से उसी जगह रहने की कोशिश करती हैं। इससे उन पर जोर पड़ता है और कुछ पत्तियाँ टूटकर गिर जाती हैं।

(सीधे शब्दों में—शाखा हिलती है, पत्तियाँ रुकना चाहती हैं, इसलिए वे झड़ जाती हैं।)





प्रश्न 4: जब कोई गतिशील बस अचानक रुकती है तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं और जब विरामावस्था से गतिशील होती है तो पीछे की ओर हो जाते हैं, क्यों?

उत्तर : यह सब जड़त्व (Inertia) की वजह से होता है।

  • बस चल रही हो और अचानक रुक जाए, तो आपका शरीर उसी गति में आगे बढ़ना चाहता है, इसलिए आप आगे की ओर झुक जाते हैं

  • बस रुकी हो और अचानक चल पड़े, तो आपका शरीर पहले की स्थिर अवस्था में ही रहना चाहता है, इसलिए आप पीछे की ओर खिंच जाते हैं

यानी शरीर अपनी पहले वाली अवस्था बनाए रखना चाहता है — यही जड़त्व है।



अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: कोई वस्तु शून्य बाह्य असंतुलित बल अनुभव करती है। क्या वस्तु अशून्य वेग से गति कर सकती है? यदि हाँ, तो वेग के परिमाण व दिशा की शर्तें बताइए। यदि नहीं, तो कारण बताइए।

उत्तर : हाँ, बिलकुल कर सकती है।

यदि किसी वस्तु पर शून्य बाह्य असंतुलित बल लग रहा हो, तो वह अशून्य वेग से चल सकती है—लेकिन एक शर्त पर:

  • वेग का परिमाण (speed) नहीं बदलना चाहिए।

  • दिशा भी नहीं बदलनी चाहिए।

यानी वस्तु सीधी रेखा में समान गति से चलती रहेगी।
न्यूटन का पहला नियम भी यही कहता है—जब तक बाहरी बल न लगाया जाए, वस्तु अपनी वर्तमान अवस्था बनाए रखती है।




प्रश्न 2: जब किसी छड़ी से एक दरी (कार्पेट) को पीटा जाता है, तो धूल के कण बाहर आ जाते हैं। स्पष्ट करें।

उत्तर : जब दरी को छड़ी से तेज़ी से मारा जाता है, तो दरी अचानक हिलती है, लेकिन धूल के कण अपने जड़त्व के कारण वहीं रुके रहने की कोशिश करते हैं। दरी हिल जाती है और धूल पीछे छूट जाती है, इसलिए वो दरी से अलग होकर बाहर निकल जाती है। यानी दरी हिलती है, धूल नहीं — इस वजह से धूल उड़ जाती है।




प्रश्न 3: बस की छत पर रखे सामान को रस्सी से क्यों बाँधा जाता है?

उत्तर : बस चलते समय कभी तेज़ होती है, कभी धीमी, और कभी मोड़ पर मुड़ती है। इन बदलावों के कारण सामान अपने जड़त्व की वजह से अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश करता है, जिससे वह फिसलकर गिर सकता है। सामान को रस्सी से बाँधने से वह हिलता नहीं और सुरक्षित रहता है।

साधारण शब्दों में—बस हिलती है, सामान नहीं… इसलिए उसे बाँधना जरूरी है।




प्रश्न 4: किसी बल्लेबाज द्वारा क्रिकेट की गेंद को मारने पर गेंद ज़मीन पर लुढ़कती है। कुछ दूरी चलने के पश्चात् गेंद रुक जाती है। गेंद रुकने के लिए धीमी होती है, क्योंकि:

(a) बल्लेबाज ने गेंद को पर्याप्त प्रयास से हिट नहीं किया है।

(b) वेग गेंद पर लगाए गए बल के समानुपाती है। 

(c) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।

(d) गेंद पर कोई असंतुलित बल कार्यरत नहीं है, गेंद विरामावस्था में आने के लिए प्रयासरत है। (सही विकल्प का चयन करें)

उत्तर : सही विकल्प है — (c) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।




प्रश्न 5: एक ट्रक विरामावस्था से किसी पहाड़ी से नीचे की ओर नियत त्वरण से लुढ़कना प्रारंभ करता है। यह 20s में 400m की दूरी तय करता है। इसका त्वरण ज्ञात करें। यदि इसका द्रव्यमान 7 मीट्रिक टन है तो इस पर लगने वाले बल की गणना करें। (1 मीट्रिक टन = 1000 kg)।

उत्तर : चूँकि ट्रक विरामावस्था से शुरू होता है, हम सूत्र लगाते हैं:

s = ½ a t²

400 = ½ × a × (20)²
400 = ½ × a × 400
400 = 200a
a = 2 m/s²

अब बल:
द्रव्यमान = 7 मीट्रिक टन = 7000 kg
F = m × a = 7000 × 2 = 14000 N

✔️ त्वरण = 2 m/s²
✔️ बल = 14000 न्यूटन




प्रश्न 6: 1 kg द्रव्यमान के एक पत्थर को 20m/s के वेग से झील की ज़मी हुई सतह पर फेंका जाता है। पत्थर 50m की दूरी तय करने के पश्चात् रुक जाता है। पत्थर और बर्फ़ के मध्य लगने वाले घर्षण बल की गणना करें।

उत्तर : पहले त्वरण (या मंदन) निकालते हैं:

सूत्र: v² = u² + 2as
0 = (20)² + 2 × a × 50
0 = 400 + 100a
100a = –400
a = –4 m/s² (माइनस इसलिए क्योंकि पत्थर धीमा हो रहा है)

अब घर्षण बल:

द्रव्यमान = 1 kg
F = m × a = 1 × 4 = 4 N

     घर्षण बल = 4 न्यूटन (गति के विपरीत)




प्रश्न 7: एक 8000 kg द्रव्यमान का रेल इंजन प्रति 2000 kg द्रव्यमान वाले पाँच डिब्बों को सीधी पटरी पर खींचता है। यदि इंजन 40000 N का बल आरोपित करता है तथा यदि पटरी 5000 N का घर्षण बल लगाती है, तो ज्ञात करें:
(a) नेट त्वरण बल, तथा
(b) रेल का त्वरण

उत्तर : इंजन का द्रव्यमान = 8000 kg, पाँच डिब्बे × 2000 kg = 10000 kg.

इंजन द्वारा आरोपित बल = 40000 N, घर्षण = 5000 N।

(a) नेट त्वरण बल = 40000 − 5000 = 35000 N

(b) कुल द्रव्यमान = 8000 + 10000 = 18000 kg
त्वरण a = F_net / m = 35000 / 18000 = 35/18 ≈ 1.94 m/s²

तो उत्तर: (a) 35000 N, (b) ≈ 1.94 m/s²



प्रश्न 8: एक गाड़ी का द्रव्यमान 1500 kg है। यदि गाड़ी को 1.7 ms-2 के ऋणात्मक त्वरण (अवमंदन) के साथ विरामावस्था में लाना है, तो गाड़ी तथा सड़क के बीच लगने वाला बल कितना होगा?

उत्तर :

द्रव्यमान (m) = 1500 kg
अवमंदन (a) = –1.7 m/s²
(माइनस इसलिए क्योंकि गाड़ी धीमी हो रही है)

सूत्र: F = m × a
F = 1500 × (–1.7)
F = –2550 N

✔️ बल = 2550 N (गति के विपरीत दिशा में)




प्रश्न 9: किसी m द्रव्यमान की वस्तु जिसका वेग है का संवेग क्या होगा?

(a) (mu)2

(b) 1/2mv2

(c) mu2

(d) mv

(उपरोक्त में से सही विकल्प चुनें।)

उत्तर :  (d) mv 

व्याख्या:
संवेग (Momentum) = द्रव्यमान × वेग
इसलिए यदि वस्तु का द्रव्यमान m और वेग v है, तो संवेग = m × v




प्रश्न 10: हम एक लकड़ी के बक्से को 200 N बल लगाकर उसे नियत वेग से फ़र्श पर धकेलते हैं। बक्से पर लगने वाला घर्षण बल क्या होगा?

उत्तर : जब बक्से को नियत वेग (constant velocity) से धकेला जाता है, तो इसका मतलब है कि बक्से की त्वरण शून्य है। न्यूटन के पहले नियम के अनुसार, अगर कोई वस्तु नियत वेग से चल रही है तो उस पर नेट बल शून्य होता है। यहाँ धकेलने वाला बल = 200 N, और बक्से का वेग स्थिर है। इसका मतलब है कि घर्षण बल भी ठीक 200 N होगा, पर विपरीत दिशा में।

    सारांश:

  • धकेलने वाला बल = 200 N (आगे)

  • घर्षण बल = 200 N (पीछे)

  • नेट बल = 0 → बक्सा नियत वेग से चलता है।




प्रश्न 11: दो वस्तुएँ, प्रत्येक का द्रव्यमान 1.5 kg है, एक ही सीधी रेखा में एक-दूसरे के विपरीत दिशा में गति कर रही हैं। टकराने के पहले प्रत्येक का वेग 2.5 ms-1 है। टकराने के पश्चात् यदि दोनों एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, तब उनका सम्मिलित वेग क्या होगा?

उत्तर : यह संपूर्ण लोचहीन टक्कर (perfectly inelastic collision) है क्योंकि दोनों टकराने के बाद जुड़ जाती हैं

दिए गए:

  • m₁ = m₂ = 1.5 kg

  • u₁ = +2.5 m/s, u₂ = –2.5 m/s (विपरीत दिशा)

सम्मिलित वेग (v) = (m₁u₁ + m₂u₂) / (m₁ + m₂)

v = [1.5 × 2.5 + 1.5 × (–2.5)] / (1.5 + 1.5)
v = (3.75 – 3.75) / 3
v = 0 / 3
v = 0 m/s

    टिप: दोनों वस्तुएँ समान द्रव्यमान और विपरीत वेग से टकरा रही हैं, इसलिए टकराने के बाद वे रुक जाती हैं।



प्रश्न 12: गति के तृतीय नियम के अनुसार जब हम किसी वस्तु को धक्का देते हैं, तो वस्तु उतने ही बल के साथ हमें भी विपरीत दिशा में धक्का देती है। यदि वह वस्तु एक ट्रक है जो सड़क के किनारे खड़ा है; संभवतः हमारे द्वारा बल आरोपित करने पर भी गतिशील नहीं हो पाएगा। एक विद्यार्थी इसे सही साबित करते हुए कहता है कि दोनों बल विपरीत एवं बराबर हैं जो एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। इस तर्क पर अपने विचार दें और बताएँ कि ट्रक गतिशील क्यों नहीं हो पाता?

उत्तर : गति का तीसरा नियम कहता है कि जब हम किसी वस्तु को धक्का देते हैं, तो वह वस्तु हम पर बराबर और विपरीत दिशा में बल लगाती है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वस्तु हमारे बल से हिलने में सक्षम नहीं है।

  • यहाँ ट्रक खड़ा है, इसका द्रव्यमान बहुत बड़ा है।

  • हम जिस बल से उसे धक्का देते हैं, वह ट्रक के द्रव्यमान और घर्षण बल के मुकाबले बहुत छोटा होता है।

  • इसलिए ट्रक गतिशील नहीं होता, क्योंकि वह बल पर्याप्त नहीं है।

गलत विचार: छात्र कह रहा है कि विपरीत बल एक-दूसरे को रद्द कर देते हैं।

  • असल में, ये बल विभिन्न वस्तुओं पर लागू होते हैं, इसलिए ये एक-दूसरे को रद्द नहीं करते

  • ट्रक पर लगाया गया बल = हमारे धक्के का बल – घर्षण बल। अगर यह शून्य या बहुत छोटा हो, तो ट्रक नहीं हिलेगा।

संक्षेप में:
ट्रक गतिशील नहीं होता क्योंकि हमारा बल बहुत छोटा है और घर्षण + भारी द्रव्यमान इसे रोकते हैं, न कि तीसरे नियम के विपरीत बल की वजह से।




प्रश्न 13: 200g द्रव्यमान की एक हॉकी की गेंद 10ms-1 की वेग से सीधी रेखा में चलती हुई 5 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से संघट्ट करती है तथा उससे जुड़ जाती है। उसके बाद दोनों एक साथ उसी रेखा में गति करते हैं। संघट्ट के पहले और संघट्ट के बाद के कुल संवेगों की गणना करें। दोनों वस्तुओं की जुड़ी हुई अवस्था में वेग की गणना करें।

उत्तर : संघट्ट से पहले कुल संवेग:

p_total = m₁u₁ + m₂u₂
= 0.2 × 10 + 5 × 0
= 2 + 0 = 2 kg·m/s


 संघट्ट के बाद (जुड़ी हुई अवस्था में) कुल संवेग:

संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार:
p_total = (m₁ + m₂) × v
2 = (0.2 + 5) × v
2 = 5.2 × v
v = 2 / 5.2 ≈ 0.385 m/s

नतीजा:

  • संघट्ट से पहले कुल संवेग = 2 kg·m/s

  • संघट्ट के बाद कुल संवेग = 2 kg·m/s

  • संयुक्त वेग = 0.385 m/s





प्रश्न 14: 10g द्रव्यमान की एक गोली सीधी रेखा में 150 ms-1 के वेग से चलकर एक लकड़ी के गुटके से टकराती है और 0.03 s के बाद रुक जाती है। गोली लकड़ी को कितनी दूरी तक भेदेगी? लकड़ी के गुटके द्वारा गोली पर लगाए गए बल के परिमाण की गणना करें।

उत्तर : लकड़ी पर लगा बल

सूत्र: F = m × a
पहले त्वरण निकालते हैं:
a = (v – u) / t = (0 – 150) / 0.03 = –5000 m/s²

अब बल:
F = m × a = 0.01 × 5000 = 50 N


गोली द्वारा लकड़ी में प्रवेश की दूरी

सूत्र: s = u t + ½ a t²
s = 150 × 0.03 + 0.5 × (–5000) × (0.03)²
s = 4.5 – 2.25
s = 2.25 m

नतीजा:

  • बल = 50 N

  • लकड़ी में दूरी = 2.25 m





प्रश्न15: एक वस्तु जिसका द्रव्यमान 1 kg है, 10ms-1 के वेग से एक सीधी रेखा में चलते हुए विरामावस्था में रखे 5 kg द्रव्यमान के एक लकड़ी के गुटके से टकराती है। उसके पश्चात् दोनों साथ-साथ उसी के सीधी रेखा में गति करते हैं। संघट्ट के पूर्व तथा पश्चात् के कुल संवेगों की गणना करें। आपस में जुड़े हुए संयोजन के वेग की भी गणना करें।

उत्तर : संघट्ट से पहले कुल संवेग

p_total = m₁u₁ + m₂u₂ = 1 × 10 + 5 × 0 = 10 kg·m/s


संघट्ट के बाद कुल संवेग

संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार:
p_total = (m₁ + m₂) × v
10 = (1 + 5) × v
10 = 6 × v
v = 10 / 6 ≈ 1.67 m/s

नतीजा:

  • संघट्ट से पहले कुल संवेग = 10 kg·m/s

  • संघट्ट के बाद कुल संवेग = 10 kg·m/s

  • जुड़ी हुई अवस्था में वेग = 1.67 m/s



प्रश्न 16: 100kg द्रव्यमान की एक वस्तु का वेग समान त्वरण से चलते हुए 6s में 5ms-1 से 8 ms-1 हो जाता है। वस्तु के पहले और बाद के संवेगों की गणना करें। उस बल के परिमाण की गणना करें जो उस वस्तु पर आरोपित है।

उत्तर : संवेग

  • पहले का संवेग: p₁ = m × u = 100 × 5 = 500 kg·m/s

  • बाद का संवेग: p₂ = m × v = 100 × 8 = 800 kg·m/s


 त्वरण (a)

a = (v – u) / t = (8 – 5) / 6 = 3 / 6 = 0.5 m/s²


 बल (F)

F = m × a = 100 × 0.5 = 50 N

नतीजा:

  • संवेग पहले = 500 kg·m/s

  • संवेग बाद = 800 kg·m/s

  • बल = 50 N (गति की दिशा में)




प्रश्न 17: अख़्तर, किरण और राहुल किसी राजमार्ग पर बहुत तीव्र गति से चलती हुई कार में सवार हैं, अचानक उड़ता हुआ कोई कीड़ा, गाड़ी के सामने के शीशे से आ टकराया और वह शीशे से चिपक गया। अख़्तर और किरण इस स्थिति पर विवाद करते हैं। किरण का मानना है कि कीड़े के संवेग परिवर्तन का परिमाण कार के संवेग परिवर्तन के परिमाण की अपेक्षा बहुत अधिक है। (क्योंकि कीड़े के वेग में परिवर्तन का मान कार के वेग में परिवर्तन के मान से बहुत अधिक है।) अख़्तर ने कहा कि चूँकि कार का वेग बहुत अधिक था अतः कार ने कीड़े पर बहुत अधिक बल लगाया जिसके कारण कीड़े की मौत हो गई। राहुल ने एक नया तर्क देते हुए कहा कि कार तथा कीड़ा दोनों पर समान बल लगा और दोनों के संवेग में बराबर परिवर्तन हुआ। इन विचारों पर अपनी प्रतिक्रिया दें।

उत्तर : इस स्थिति में न्यूटन का तीसरा नियम और संवेग का नियम काम कर रहे हैं।

  • तीसरा नियम: जब कीड़ा कार से टकराता है, तो कार की ओर कीड़े पर बल उतना ही है जितना कीड़े की ओर कार पर बल। बल हमेशा बराबर और विपरीत होता है।

  • संवेग का बदलाव: संवेग परिवर्तन (Δp = F × t) बल और समय पर निर्भर करता है।

अब तीनों विचार:

  1. किरण: कहती है कि कीड़े का संवेग परिवर्तन बहुत अधिक है।

    • गलत है। संवेग परिवर्तन बल × समय पर निर्भर करता है। कार और कीड़ा पर लगाया गया बल बराबर है, टकराने का समय लगभग समान है।

    • द्रव्यमान के कारण कीड़े का वेग तेजी से बदलता है, इसलिए उसकी गति में बदलाव बड़ा लगता है, लेकिन संवेग का परिमाण कार के संवेग परिवर्तन के बराबर नहीं है, क्योंकि कार का द्रव्यमान बहुत बड़ा है।

  2. अख़्तर: कहता है कि कार ने बहुत अधिक बल लगाया।

    • यह आंशिक रूप से सही है कि कीड़े का शरीर छोटा है, इसलिए छोटे बल से ही वेग बदलता है और चोट लगती है। लेकिन कार का बल उतना अधिक नहीं है जितना वह सोचता है, बल बराबर होता है।

  3. राहुल: कहता है कि बल बराबर लगा और संवेग परिवर्तन बराबर है।

    • बल बराबर सही है।

    • लेकिन संवेग परिवर्तन बराबर नहीं क्योंकि Δp = m × Δv। कीड़े का द्रव्यमान बहुत छोटा है, इसलिए उसकी गति में बदलाव बहुत बड़ा होगा, जबकि कार का द्रव्यमान बहुत बड़ा है, इसलिए उसकी गति में बदलाव नगण्य है।




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